कारगर FOPL से भारत में रोके जा सकते हैं नॉन कम्‍युनिकेबल रोग, 58 लाख लोगों में होता है मौत का खतरा

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नई दिल्‍ली : वैश्विक और स्थानीय विशेषज्ञ भारत के गैर-संचारी रोगों (NCD) के बढ़ते संकट से निपटने के लिए सरल और प्रभावी फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबल (FOPL) को प्रभावी बनाने के लिए एक साथ आए हैं. दरअसल, 135 म‍िलियन से अधिक भारतीयों में मोटापे (Obesity) और बचपन के मोटापे में तेजी से वृद्धि का स्‍वास्‍थ्‍य संकट आन खड़ा हुआ है. हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure), हाई फास्टिंग ब्‍लड शुगर लेवल और मोटापा भारत में इस बीमारी के मुख्‍य कारकों के रूप में उभरे हैं. हाल ही में हुई एक वेबिनार में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने भारत में मजबूत एवं कारगर FOPL की जरूरत पर बल देते हुए चर्चा की.

भारत में हालात ये हैं कि लगभग 58 लाख लोग या 4 में से 1 भारतीय के 70 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले गैर-संचारी रोगों से मरने का खतरा होता है. 1990 में इन रोगों का बोझ 30% (विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष) से बढ़कर 2016 में 55 प्रतिशत तक जा पहुंचा. इन हालातों के कारण होने वाली मौतों की दर 1990 में 37% से बढ़कर 2016 में 61% तक हो गई. गंभीर बात यह है कि एनसीडी से सबसे ज्‍यादा हृदय रोग (सीवीडी) में कम से कम 27% मौतें हुई हैं.

वहीं, अनुपचारित और अनियंत्रित हाई ब्‍लड प्रेशर भारत में अनुमानित 1.6 मिलियन लोगों की मौत वजह बनता है. इनमें से 57% मौतें स्ट्रोक से संबंधित हैं और 24% कोरोनरी हृदय रोग से संबंधित हैं. भारत भी तेजी से मधुमेह और कैंसर हॉटस्पॉट बनता जा रहा है. यह संकट COVID-19 महामारी से और तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि NCDs से ग्रस्‍त लोगों के गंभीर रूप से बीमार होने या COVID-19 से मरने का अधिक खतरा होता है.

अब ध्‍यान देने वाली बात यह है कि यह सभी स्‍वास्‍थ्‍य स्थितियां जैसे कि उच्च रक्तचाप, हाई फास्टिंग ब्‍लड शुग लेवल्‍स और मोटापा अस्वास्थ्यकर आहार (Unhealthy Diets) से जुड़े हुए हैं और ये सभी शुगर, टोटल फैट, संतृप्त वसा, ट्रांस वसा और सोडियम के अत्यधिक सेवन की वजह से हो रही हैं. अस्वास्थ्यकर पोषक प्रोफाइल वाले प्रसंस्कृत और अति-प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद इनकी मुख्‍य वजहें हैं. रिपोर्टों के अनुसार, Covid 19 के दौरान ऐसे फूड एंड बैवरेजिस इंडस्‍ट्री काफी फायदे हैं, क्‍योंकि कम से मध्‍यम आय वाले देशों में पैकेज्‍ड अनहेल्‍दी फूड्स के उत्‍पादन के साथ-साथ इनकी मांग भी बढ़ी है.दरअसल, फ्रंट-ऑफ-पैकेज चेतावनी लेबलिंग स्वस्थ जीवन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक रणनीति के प्रमुख घटकों में से एक है, क्‍योंकि यह उपभोक्ताओं को त्वरित, स्पष्ट और प्रभावी तरीके से यह पहचानने में सक्षम बनाता है क‍ि वह जिस उत्‍पादन को खरीद रहे हैं, उसमें कितनी शुगर, सोडियम, संतृप्त वसा, ट्रांस वसा और कुल वसा है.

इंडियन कोएलिशन फॉर द कंट्रोल ऑफ आयोडीन डेफिशियेंसी डिसऑर्डर (ICCIDD) के प्रेजिडेंट डॉ. चंद्रकांत पांडव कहते हैं कि ‘यह वक्‍त स्‍वाथ्‍य को लेकर लापरवाही बरतने का कतई नहीं है. यह समय स्पष्ट रूप से हमारे स्वास्थ्य संकटों को दूर करने और हमारी भावी पीढ़ियों को सुरक्षित रखने का है, जिसके लिए हमें अपने खानपान में भारी बदलाव करने की आवश्यकता है. यहां तक कि जब हम अपने भोजन को हेल्‍दी बनाने के लिए कदम बढ़ाते हैं, तो लोगों को पोषक तत्वों यानी नमक, चीनी और वसा की उच्च सांद्रता के बारे में जानकारी मिलती है’.

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना गिलिंग्स स्कूल ऑफ ग्लोबल पब्लिक हेल्थ के डब्ल्यूआर केनन जूनियर न्‍यूट्रिशन के प्रतिष्ठित प्रोफेसर डॉ.बैरी पॉपकिन ने भी कई देशों में जांच को लेकर अपने अनुभव साझा किए. उन्‍होंने बताया कि अभी तक के मूल्यांकन में हमने पाया है कि सभी देशों ने FOPL की चेतावनी लेबल प्रणाली को अपनाया है, जिसके चलते सबसे अस्वास्थ्यकर अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थों की खपत को कम करने में सफलता मिली है. उपलब्ध साक्ष्यों द्वारा सुझाया गया है यह मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसे मोटापे और पोषण संबंधी एनसीडी को रोकने के लिए सबसे प्रभावी दृष्टिकोणों में से एक है. लोगों को बस यह समझने की जरूरत है कि उस भोजन में क्या है, जो वे खरीद रहे हैं.

ग्लोबल हेल्थ एडवोकेसी इनक्यूबेटर की रिज़नल डायरेक्‍टर वंदना शाह ने दुनिया भर में FOPL चेतावनी नीतियों के निर्माण की ओर सबका ध्‍यान दिलाया. उन्‍होंने कहा कि भारत उन देशों की बढ़ती सूची में शामिल हो सकता है जो अपने लोगों के जीवन की सुरक्षा के लिए एक मजबूत FOPL होने की जरूरत महसूस कर रहे हैं. चेतावनी लेबल मोटापे और मधुमेह के खिलाफ हमारी लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण है. भारत अपने तेजी से बढ़ते खाद्य उद्योग और विविध जनसांख्यिकी के साथ एक क्षेत्रीय रोडमैप के लिए नेतृत्व कर सकता है. भारत एक बेहतर लेबलिंग प्रणाली चुनकर उपभोक्ताओं को स्वास्थ्यप्रद विकल्प के लिए सबसे अच्छा मार्गदर्शन दे सकता है.

कंज्‍यूमर वॉयस के सीओओ आशीम सान्‍याल कहते हैं कि किराने की दुकान या सुपरमार्केट में उपभोक्ताओं को कई प्रकार के विकल्पों का सामना करना पड़ता है और उन्‍हें कुछ ही सेकंड में उसे खरीदने को लेकर अपना फैसला लेना होता है. एफएसएसएआई ने ट्रांस वसा की सामग्री को कैप करके हमारी खाद्य प्रणालियों को स्वस्थ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. अब एचएफएसएस खाद्य पदार्थों के लिए सीमा निर्धारित करने और और एक लेबलिंग प्रणाली विकसित करने का वक्‍त है, जो उस जानकारी को सबसे प्रभावी ढंग से साझा करे.

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