घाटशिला के दुधकुंडी गांव में हाथियों का आतंक, देखें वीडियो

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घाटशिला के दुधकुंडी गांव में आतंक मचाने वाला हाथी

झारखंड(Jharkhand) के घाटशिला(Ghatshila) के बहरागोडा प्रखंड के बंगाल सीमावर्ती गांव दुधकुंडी में हाथियों का आतंक(Elephant panic) है. बीते एक सप्ताह से एक हाथी गांव वालों को परेशान कर रखा है. एक सप्ताह करीब 10 हाथियों का झुंड़ जंगल से गांव पहुंचा था, लेकिन उसमें एक हाथी गांव के आस पास ही रह गया. अब उस हाथी ने गांव में आतंक फैला रखा है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    February 13, 2021, 1:21 PM IST

झारखंड(Jharkhand) के घाटशिला(Ghatshila) के बहरागोडा प्रखंड के बंगाल सीमावर्ती गांव दुधकुंडी में हाथियों का आतंक(Elephant panic) है. बीते एक सप्ताह से एक हाथी गांव वालों को परेशान कर रखा है. एक सप्ताह करीब 10 हाथियों का झुंड़ जंगल से गांव पहुंचा था, लेकिन उसमें एक हाथी गांव के आस पास ही रह गया. अब उस हाथी ने गांव में आतंक फैला रखा है. रात होते ही हाथी खेतों में घुस जाता है. और हजारों का नुकसान किसानों को प्रति दिन पहुंचा रहा है. हालांकि हाथी को भगाने के लिये ग्रामीण भी रात-रात भर जग रहे हैं. वन विभाग के कर्मी भी हाथी को भगाने में लगे है, लेकिन हाथी गांव के समीप जंगल में ही ठहरा है. अब तक हाथी दर्जन भर से ज्यादा सब्जी के खेतों में नुकसान पहुंचा चुका है. ग्रामीणों ने बताया कि आलू, टमाटर, मटर, खीरा समेत अन्य सब्जी को हाथी खाने के बाद फसल को कुचलने से प्रति दिन हजारों का नुकसान हो रहा है.

ग्रामीणों ने फसल के नुकसान को देखते हुए बहरागोडा विधायक से गुहार लगायी, जिस पर विधायक ने फसल के नुकसान का जायजा लिया और वन विभाग से मुआवाज दिलाने का भरोसा दिलाया है. 

बंगाल वन विभाग की ओर से खोदे गए ट्रंच 

बंगाल सीमा पर बंगाल वन विभाग की ओर से काफी बड़ा ट्रंच खोदे गए हैं , जिससे हाथी सीमा को पार कर बंगाल के जंगल नही जा पाते हैं. हाथियों का झुंड झारखंड के जंगल में ही है. विधायक समीर महंती ने भी ट्रंच के बारे कहा कि बंगाल सीमा पर खोदे गये ट्रंच को बंगाल और झारखंड दोनो वन विभाग के संयुक्त बातचीत कर ही खोदा जाना चाहिए था. लेकिन बंगाल ने ऐसा नही किया. हाथी को कैसे इस गांव से निकाला जाये यह प्रयास वन विभाग कर रहा है. हाथियों ने अब तक कई गांवों में नुकसान पहुचाया. कई लोगों की जान भी चली गयी है. हाथियों के आतंक को लेकर उन्होंने विधान सभा में भी आवाज उठायी थी, लेकिन अब तक वन विभाग के द्वारा समुचित व्यवस्था नहीं की गयी है. जरूरत है हाथियों के कोरीडोर बनाने की ताकि हाथियों का झुंड अपने रास्ते ही चल सके.








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