फिल्म रिव्यू: एक दर्दनाक कहानी का आशाओं से भरा अंत है ‘रुख’

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फिल्म रुख का रिव्यू

दुःख, प्यार और किसी को खो देने वाली यह दर्दभरी कहानी अंत में अपने साथ बहुत सारी आशाएं लेकर आती है.

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 1, 2017, 4:03 PM IST

रुख कहानी है अपने किसी प्रिय के चले जाने को मां पाने की और खुद को उसी रूप में स्वीकार कर पाने की जो आप उनके जाने के बाद बन गए हैं.

यह एक बेटे की कहानी है जो अपने पिता की मौत के बाद एक रहस्यमयी जिंदगी में डूबता चला जाता है और उसी बीच खुद को तलाश करता है.

पिता दिवाकर (मनोज बाजपेयी) एक कार एक्सीडेंट में मारा जाता है. उसका बेटा ध्रुव (आदर्श गौरव) पिता के क्रियाकर्म के लिए हॉस्टल से घर आता है. घर आकर उसे एक के बाद एक कई राज पता चलते हैं. उसे पता चलता है कि उसका पिता बिजनेस में बर्बाद हो चुका था, पार्टनर की धोखाधड़ी की वजह से उनकी फैक्ट्री बंद हो चुकी थी और उसकी मां अभी भी उससे कुछ छिपा रही थी.

ध्रुव को यकीन है कि उसके पिता की मौत महज एक्सीडेंट नहीं, एक मर्डर है. वो ठान लेता है कि इस मुद्दे की गहराई तक जाएगा. इसके चलते उसे कई बड़ी मुसीबतों और जानलेवा हमलों का सामना करना पड़ता है.निर्देशक अटाणु मुखर्जी की यह पहली फिल्म है और उनका यह प्रयास दर्शको को खुद से जोड़े रखता है. ध्रुव जब रहस्यों की तहें उठाता है, देखने वाले भी उसके साथ उन पर्दों को पलटते हैं. इस यात्रा में ध्रुव को अपने पिता के बारे में जो पता चलता है, उसे लगता है वो उन्हें कभी जानता ही नहीं था. लेकिन फिल्म का कथानक बहुत ही धीमी गति से आगे बढ़ता है. यह एक अच्छी थ्रिलर फिल्म है लेकिन इसे देखते हुए आप चाहते हैं कि कहानी जल्दी आगे बढ़े.

भले ही यह फिल्म बहुत बोझिल और धीमी है, सभी कालाकारों की एक्टिंग बेहतरीन है. मनोज बाजपेयी और स्मिता तांबे में एक गजब की स्थिरता है वहीं आदर्श गौरव के किरदार की एंग्जायटी आपको विचलित करती है.

हम इस फिल्म को 3 स्टार दे रहे हैं. दुःख, प्यार और किसी को खो देने वाली यह दर्दभरी कहानी अंत में अपने साथ बहुत सारी आशाएं लेकर आती है.

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