बेकार नहीं, ये हैं 1 अरब 32 करोड़ रु के पत्थर, छोटा-सा टुकड़ा भी बदल देगा किस्मत

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काले कोयले सा दिखने वाला ये पत्थर असल में सोने और हीरे से भी महंगा है

बगल में जो पत्थर आपको नजर आ रहा है, वो कोई ऐसा-वैसा पत्थर नहीं है. इसकी कीमत अरबों में (Precious Stones) है. इसका एक छोटा सा टुकड़ा खरीदने के लिए भी आपको लाखों रुपए खर्च करने पड़ेंगे. आखिर क्या है इस पत्थर के इतने कीमती होने की वजह…

आपने सोने-हीरे (Gold-Diamond) के लिए लोगों को करोड़ों रुपए तक खर्च करते देखा होगा. लेकिन आज हम जिन पत्थरों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं वो इनसे भी कई गुना ज्यादा कीमती है. आखिर क्या हैं ये पत्थर और इनमें ऐसा क्या है जिसकी वजह से इनकी इतनी ज्यादा कीमत है? दरअसल, ये पत्थर हैं मून गोल्ड (Moon Gold). जी हां, मून गोल्ड यानी चांद की सतह से लाए गए पत्थर. इनमें सोने के कण के अलावा कई बेशकीमती धातु होते हैं, जिसकी वजह से इसकी इतनी ज्यादा कीमत है.

14 दिसंबर 1972 को नासा (NASA) के एस्ट्रॉनॉट (Astronaut) यूजीने केर्नन (Eugene Cernan) ने सबसे पहले अपोलो17 लूनर मॉड्यूल (Apollo 17 Lunar Module) से कदम बाहर रखकर चांद की सतह से एक पत्थर उठाया था. उसके बाद से अब तक ऐसे कुछ पत्थर पृथ्वी पर लाए जा चुके हैं. इन पत्थरों के नीचे सोना और प्लैटिनम (Platinum) का अंबार है, ऐसा दावा किया जाता है. इस वजह से इन पत्थरों की कीमत भी काफी ज्यादा है.

बेशकीमती हैं ये पत्थर

अभी तक स्पेस के ज्ञाताओं ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि इनमें सोना और प्लैटिनम के अलावा और कौन कौन सी धातु मौजूद है? लेकिन इस बात के सबूत मिले हैं कि इनमें नॉन-रेडियोएक्टिव हीलियम 3 मौजूद हो सकता है, जिससे न्यूक्लियर रिएक्टर्स को मदद मिलेगी.अमेरिका और चीन में हो सकता है मुकाबला

इन पत्थरों की माइनिंग के लिए अब अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला हो रहा है. दोनों ही देश ज्यादा से ज्यादा मून गोल्ड पृथ्वी पर लाने की कोशिश में लगे हैं. साथ ही साथ उनकी कोशिश है कि चांद पर एक रॉकेट फ्यूल पंप बनाया जाए ताकि अगर कोई रॉकेट मंगल या दूसरे मिशन में जाए तो चांद से उसमें ईंधन रिफिल किया जा सके.

पानी की भी है तलाश

ईंधन के अलावा चाँद पर की जा रही खोजों में सबसे अहम है पानी. इसकी सतह पर पानी की खोज कई सालों से चल रही है. नासा का कहना है कि चांद पर करीब 600 मिलियन से लेकर 1 बिलियन मेट्रिक टन तक बर्फ है. अगर सतह पर पानी मिल गया तो पृथ्वी की तरफ चांद बनाकर लोगों को बसाने का कार्यक्रम शुरू कर दिया जाएगा.





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