मिलिए ‘लेडी टार्जन’ से, दांतों से तोड़ा नारियल और पेड़ पर चढ़ने में एक्सपर्ट, बंदरों से खासी दोस्ती

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आम तौर पर हमारी दादियां-नानियां हमें परियों की कहानी सुनाती हैं. हालांकि वो कहानियां काल्पनिक होती हैं. ब्रिटेन की एक ऐसी ही दादी (Marina Chapman) हैं, जिनके पास कहानियां तो हैं – लेकिन जंगल की. ये कहानियां उनकी असल ज़िंदगी (The Girl Raised by Monkeys) की हैं, जिनके ज़रिये वे अपना बचपन जंगल (Real Tarzan Lady) में बीतने की पूरी लाइफस्टोरी बताती हैं.

मरीना चैपमैन के (Marina Chapman) पास जंगल की तमाम दिलचस्प कहानियां (Jungle Tales) हैं. मरीना जब 5 साल की थीं, तब उन्हें किसी ने उनके घर से किडनैप कर लिया था. एक बार उन्होंने भी कोशिश की गई. तभी एक बजुर्ग बंदर ने उनकी जान बचाई. वे उस बंदर को अपने दादा के तौर पर सम्मान देती हैं. सुनने में ये कहानी हमें- आपको भले ही अजीब (The Girl Raised by Monkeys) लग रही हो, लेकिन मरीना के जीवन की ये सच्चाई ह, जिसे 71 बरस की होने के बाद भी वे नहीं भूल पाई हैं.

कैसे बनीं बदरों के परिवार की सदस्य

मरीना जब 4 साल की थीं, तो उन्हें किसी ने घर के बगीचे से किडनैप कर लिया था. जब उनकी आंख खुली तो वे जंगल में थीं और काफी डरी हुई थीं. वहां एक बंदरों के परिवार ने उन्हें जंगल की ज़िंदगी जीना सिखाया. वे बताती हैं कि बंदरों की एक पूरी कॉलोनी थी, जहां वे रहती थीं. उन्होंने उनकी ही तरह खाना-पीना सीख लिया था. मरीना के लिए साफ पानी का बंदोबस्त भी बंदर करते थे. यहां तक कि 5 साल की उम्र में एक बार जब उन्होंने कुछ ज़हरीला खा लिया तो एक बूढ़े बंदर ने उनकी जान बचाई.

इंसानी बस्ती में कैसे पहुंचीं?

वे 4 साल से करीब 10 साल तक होने तक वे जंगल में ही रहीं. बंदरों की तरह वो पेड़ पर रहती थीं, सोती थीं और उनके बाल भी काफी मोटे हो चुके थे. एक दिन जंगल में आए एक शिकारी के हाथ मरीना लग गईं और वो उन्हें लेकर चला आया. मरीना को उसने एक मेड के तौर पर बेच दिया. जहां से उसका सौदा एक अमीर व्यापारी को करने की बात होने लगी. इसे सुनकर मरीना वहां से भाग गईं. आखिरकार वे ब्रिटेन में एक परिवार के साथ रहीं और उनकी शादी यॉर्कशायर में हो गई.

किताब में बताई अपनी कहानी

मरीना की अब 2 बेटियां भी हैं. अपनी बेटियों को मरीना अपने बचपन की ये कहानियां सुनाती रहती थीं. इनमें से एक बेटी की मदद से उन्होंने अपनी जिंदगी पर आधारित किताब भी लिखी – The Girk With No Name. उनकी बात साबित करने के लिए उन्हें लाई डिटेक्टर टेस्ट से भी गुजरना पड़ा और ये साबित भी हुआ कि वे 4 से 10 साल की उम्र में तमाम तरह की डेफिशियंसी से गुजर रही थीं. वे ऊंचे-ऊंचे पेड़ों पर बंदरों की तरह झट से चढ़ जाती थीं और नारियल को दांत से तोड़ने की क्षमता रखती थीं.

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