FILM REVIEW : ये ‘प्लैनेट ऑफ़ दि ऐप्स’ सीरीज़ की बेस्ट मूवी है

प्लैनेट ऑफ़ दि ऐप्स सीरीज़ की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है वॉर फॉर दि प्लैनेट ऑफ दि ऐप्स प्लैनेट ऑफ़ दि ऐप्स सीरीज़ की सर्वश्रेष्ठ फिल्म है वॉर फॉर दि प्लैनेट ऑफ दि ऐप्स हॉलीवुड की इस फिल्म का इंतज़ार ‘प्लैनेट ऑफ़ ऐप्स’ फ़्रैंचाइज़ी के फ़ैन्स को लंबे समय से था और अब जब ये फिल्म आई …

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फिल्म रिव्यू: बंटवारे के बारे में कुछ नया नहीं बताती गुरिंदर चड्ढा की ‘पार्टीशन-1947’

पार्टीशन 1947. गुरिंदर चड्ढा की वो फिल्म जिससे वो इमोशनली बहुत जुड़ी हुई हैं. लेकिन फरवरी में दुनिया भर में रिलीज होने के बाद 18 अगस्त को भारत में रिलीज हो रही यह फिल्म दर्शकों के साथ जुड़ाव बना पाएगी, इसकी उम्मीद कम ही लगती है. अंग्रेजी भाषा में यह फिल्म ‘वाइसरॉय हाउस’ नाम से …

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फिल्म समीक्षा: ‘जॉली एलएलबी– 2’ के हर सीन में आपको आएगी अरशद वारसी की याद

‘जॉली एलएलबी– 2’ की कहानी में आतंकवाद, भ्रष्टाचार, सरकारी बाबुओं की लापरवाही और एक मर्डर भी है. इन सबके बीच कुछ जोक्स भी ठूसे गए हैं. ‘जॉली एलएलबी– 2’ की कहानी में आतंकवाद, भ्रष्टाचार, सरकारी बाबुओं की लापरवाही और एक मर्डर भी है. इन सबके बीच कुछ जोक्स भी ठूसे …

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FILM REVIEW: ‘इंदु सरकार’ कहानी इमरजेंसी के दौर की

फिल्म इंदु सरकार. विवादित और बहुप्रतीक्षित. मधुर भंडारकर देश के उस काल पर फिल्म लेकर आए हैं जिसका जिक्र होते ही उनकी फिल्म का विरोध शुरू हो गया था. साल 1975 में देश में इमरजेंसी काल था जो 19 महीनों तक चला. इस बीच जो कुछ घटा, दावा था कि इस फिल्म में उसका कच्चा-चिट्ठा …

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बाहुबली 2 देखने जा रहे हैं तो पढ़ लें ये Film Review

इंतज़ार की घड़ियां अब ख़त्म हो गई हैं. बाहुबली 2 रिलीज़ हो चुकी है. फ़िल्म की कहानी को लेकर बहुत सारे कयास लगाए जा रहे थे. एस एस राजमौली के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म भारतीय फ़िल्म इतिहास की सबसे बड़ी फ़िल्म है. राज़ से नहीं रिकैप से शुरू होती है फ़िल्म: बाहुबली 2′ की …

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FILM REVIEW: जग्गा जासूस का सफर मजेदार भी है और थकाने वाला भी

फिल्म जग्गा जासूस में एक डायलॉग है जिसमें रणबीर के पिता टूटी फूटी (सस्वाता चटर्जी), ये उनके किरदार का नाम है, अपने बेटे जग्गा (रणबीर कपूर) को कहते हैं कि दिमाग का बायां हिस्सा लॉजिकल है यानी ये हिस्सा तर्क करता है. जबकि दायां हिस्सा इमोशनल है और क्रिएटिव है इसलिए जब हम गाना गाते …

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FILM REVIEW: ‘हिंदी मीडियम’ से होने का असली दर्द दिखाती है ये कॉमेडी

फ़िल्म: हिंदी मीडियम निर्देशक: साकेत चौधरी कलाकार: इरफ़ान खान, सबा कमर, दीपक डोबरियाल रेटिंग: 4.5 स्टारनिर्देशक साकेत चौधरी की ‘हिंदी मीडियम’ सिर्फ़ ‘एक’ फ़िल्म नहीं है. कई छोटे-छोटे किस्से हैं, राज यानि इरफ़ान खान और मीता बत्रा यानि सबा कमर की ज़िन्दगी के, जो एक कॉमन धागे से सिले गए हैं. कॉमन धागा है उनकी …

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फ़िल्म रिव्यू: ‘हाफ़ गर्लफ्रेंड’, बोरिंग से थोड़ा ज़्यादा, लॉजिक से काफ़ी कम

एक लड़का और एक लड़की मिलते हैं, फिर बिछड़ते हैं, फिर मिलते हैं, फिर बिछड़ते हैं, फिर मिलते हैं और फिर आप अपने बाल नोचने लगते हैं. Source link

फ़िल्म रिव्यू: टॉम क्रूज़ की ‘ममी’ बड़ी ख़तरनाक है!

‘ममी’ यानि पुरातन ईजिप्ट में मरे हुए लोगों को बैंडेज और मसाला लगाकर पिरामिड में सुरक्षित रखने का तरीका. लेकिन किसी भी शरीर को ममी बनाकर रखने की पहली शर्त है कि वो मर चुका हो. लेकिन जहां अपवाद नहीं, वहां फ़िल्म कैसे बनेगी! तो फ़िल्म में अपवाद है कि इस बार एक महिला को …

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FILM REVIEW: हीरो-हीरोइन की नहीं, विलेन-हीरोइन की लव स्टोरी है ‘राब्ता’

‘पुनर्जन्म’ भारतीयों के पसंदीदा विषयों में से है. अब के बरस, मगधीरा, क़र्ज़, ओम शांति ओम और फिर राब्ता. दो जन्मों की कहानी. जहां प्यार करने वाले बिछड़ जाते हैं, किसी अगले जन्म में मिलने का वादा करके. वो फिर से जन्म लेते हैं और उन्हें जुदा करने वाले विलेन से बदला लेते हैं. बाकी …

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फ़िल्म रिव्यू: ‘डेस्पिकेबल मी 3’ जो इस सीरीज़ की आख़िरी फ़िल्म हो सकती है!

एक हिट फ्रेंचाइज़ी का नाम, 80 के दशक का ज़िक्र, तीन प्यारी बच्चियां, यूनिकॉर्न, मिनियन और मुख्य किरदार का डबल रोल. ये सारा फार्मूला है एक क्यूट सी एनीमेशन फ़िल्म बनाने का. इसमें गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं दिखती. यूनिवर्सल पिक्चर्स और इल्यूमिनेशन एंटरटेनमेंट की लोकप्रिय फ्रेंचाइज़ी ‘डेस्पिकेबल मी’ की यह तीसरी फ़िल्म इस सीरीज़ को …

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FILM REVIEW: ‘बैंक चोर’ फिल्म से अच्छा तो उसका प्रमोशन ही था!

रितेश देशमुख की फिल्म बैंक चोर का प्रमोशन बहुत धूमधाम से हुआ था. बाकी फिल्मों का प्रमोशन होता है, इस फिल्म का ‘मासिक प्रमोशन समारोह’ चला था. हर रोज किसी नई फिल्म के पोस्टर पर रितेश देशमुख, विवेक ओबेरॉय या रिया चक्रवर्ती के चेहरे चिपके हुए नज़र आते थे. फिल्म के लिए माहौल तो बहुत …

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FILM REVIEW: ‘ट्यूबलाइट’ यानी इमोशन, इमोशन और सिर्फ इमोशन..!

‘ट्यूबलाइट’. सलमान खान और सोहेल खान के ‘भाईचारे’ की कहानी. उत्तर भारत में ‘ट्यूबलाइट’ उस शख्स को कहते हैं जो हर बात देर में समझता है, वैसे ही जैसे ट्यूबलाइट ‘पक-पक’ करके जलती थी. आज के एलईडी वाले जमाने के लोग ये बात कम ही जानते होंगे. लेकिन फिल्म में ‘ट्यूबलाइट’ के दोनों मतलब को …

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FILM REVIEW: ‘मॉम’ जो अपने बच्चों के लिए ‘कुछ भी’ कर सकती है!

‘मॉम’ यानि मां, मम्मी, आई, अम्मी. अपने बच्चों का खोया सुकून वापस लाने के लिए, बच्चों का प्यार पाने के लिए वो किस हद तक जा सकती है इसकी कोई लिमिट नहीं है. श्रीदेवी की 300वीं फिल्म ‘MOM’ एक क्लासरूम से शुरू होकर बर्फ के मैदान में खत्म होने वाली एक इमोशनल जर्नी है. हर …

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फिल्म रिव्यू: ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’, जिस फिल्म ने सेंसर बोर्ड को आहत कर दिया!

4 औरतें हैं. भोपाल के छोटे से मोहल्ले में रहती हैं. हिंदू और मुसलमान धर्मों की हैं. ये चारों हमारे ही समाज का हिस्सा हैं जहां आदमियों को हमेशा औरतों से थोड़ा ज्यादा ही मिलता है. चारों की परिस्थितियां अलग हैं लेकिन चारों के सपने एक जैसे. ‘लिपस्टिक वाले सपने.’ इस घुटन से आजादी वाले …

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फिल्म रिव्यू: ‘गेस्ट इन लंदन’, बकवास, बेवजह, बोरिंग

इस फिल्म में पहले चाचाजी का ‘फार्ट’ आता है फिर वर्ल्ड ट्रेड सेंटर तबाह हो जाता है. सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष माननीय पहलाज निहलानी जी महत्वपूर्ण मुद्दों पर बनने वाली फिल्मों पर कैंची चला देते हैं. लेकिन ‘गेस्ट इन लंदन’ जैसी फिल्में, जिनमें जगह-जगह सिर्फ ‘फार्ट’ भरी हुई है, आराम से रिलीज हो जाती हैं. …

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