24 साल में इस शख्स ने अपनी कड़ी मेहनत से बंजर जमीन पर उगा दिया जंगल, जानिए कैसे किया ये करिश्मा!

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फोटो साभार: odditycentral

सदीमान (Sadiman) ने शुरू में अपने पैसों से खरीदे हुए बरगद (Banyan) के पौधे उस बंजर इलाके में लगाना शुरू किए. कई बार रुपये जुटाने के लिए उन्होंने अपने पालतू जानवरों को बेच दिया. लोगों ने उसे पागल कहना शुरू कर दिया. फिर भी वो अपने काम में लगे रहे. वो हर दिन बरगद और फिकस के पौधे बंजर पहाड़ी इलाके में लगाने लगे.

प्रकृति (Nature) से प्रेम करना सबसे जरूरी है क्योंकि बिना प्रकृति के इस दुनिया में कुछ भी नहीं है. इस बात को इंडोनेशिया (Indonesia) के एक व्यक्ति ने दूसरों को भी समझा दिया है. सदीमान (Sadiman) नाम के व्यक्ति ने एक अनोखा कारनामा कर दिखाया है जिसके लिए संपूर्ण मानव जाति को उनका शुक्रिया अदा करना चाहिए. दरअसल, इंडोनेशिया के सदीमान ने करीब जीवन के 24 साल एक बंजर पहाड़ी के 250 हेक्टेयर जमीन को हरा-भरा बनाने में बिता दिये और अब उनकी मेहनत रंग लाई है. वो बंजर पहाड़ी एक जंगल का रूप ले चुकी है.

इंडोनेशिया के जावा (Java) शहर में 1960 के दौरान आग लग गई थी. इस आग के कारण कई सौ एकड़ के देवदार (Pine) के जंगल जल कर राख हो गए और इस इलाके को बंजर बना दिया. कई दशकों तक इलाके के ग्रामीण सूखे और भुखमरी से जूझते रहे. तब सदीमान ने अपने हाथों में ये जिम्मेदारी ली कि वो फिर से उस जंगल को जीवित करें. पहले तो सब उन्हें पागल समझते थे क्योंकि उनका लक्ष्य हासिल करने लायक नहीं था. उनका साथ ना ही वहां के ग्रामीणों ने दिया और ना ही प्रशासन ने. फिर भी सदीमान ने हार नहीं मानी. वो जंगल को फिर से जीवित करने की फिराक में लगे रहे.

सदीमान ने शुरू में अपने पैसों से खरीदे हुए बरगद के पौधे उस बंजर इलाके में लगाना शुरू किए. कई बार रुपये जुटाने के लिए उन्होंने अपने पालतू जानवरों को बेच दिया. लोगों ने उन्हें पागल कहना शुरू कर दिया. फिर भी वो अपने काम में लगे रहे. वो हर दिन बरगद और फिकस के पौधे बंजर पहाड़ी इलाके में लगाने लगे. उन्हें पता था कि ये दोनों पेड़ पानी की बचत करते हैं. वो इस बात को जानते थे कि जितने ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे उतनी ज्यादा इलाके से पानी की समस्या खत्म होगी और लोगों को खाने के लिए भी चीजें प्राप्त हो सकेंगी.

ऐसा अंदाजा लगाया जाता है कि सदीमान ने 25 साल में 11,000 पेड़ों को बोया है. मगर उनके इस नेक काम का फल हासिल करने में भी 10 साल से ज्यादा का वक्त लगा. जैसे-जैसे पौधे बड़े होते गए वैसे-वैसे इलाके में घास-फूस भी बढ़ती चली गई. जंगल बढ़ने से इलाके में किसानों को भी काफी फायदा हुआ. उन्हें सिंचाई के लिए पानी की भी काफी व्यवस्था मिलने लगी.

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सदीमान को लोगों की तारीफ मिलने लगी. उन्हें कल्पतरू पुरस्कार से नवाजा गया. ये अवॉर्ड पर्यावरण के लिए काम करने वाले लोगों को वहां की सरकार की ओर से मिलता है. इसके अलावा उन्हें साल 2016 में किक एंडी अवॉर्ड से भी नवाजा गया था. पिछले कुछ सालों में इस जंगल का नाम सदीमान फॉरेस्ट रख दिया गया है. सदीमान के इस काम से कई लोग इंस्पायर हुए हैं. सदीमान अब करीब 70 साल के हैं और आज भी लोग उनसे इंस्पायर होते हैं.





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