Black Space Review: रफ्तार की वजह से मात खा गई असीम संभावनाओं वाली वेब सीरीज

Share Now To Friends!!

Black Space Review : कुछ हफ्तों पहले फिलिस्तीन और इजराइल के बीच के खूनी संघर्ष, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने अस्तित्व की लड़ाई बन कर उभरा. इजराइल के कठोर कदमों और आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देने वाला दांव भी उल्टा पड़ गया. इसी इजराइल से कई बेहतरीन फिल्में और वेब सीरीज पिछले कुछ सालों से दर्शकों को नए तरह का कॉन्टेंट परोस रही हैं, जैसे – फौदा, मोसाद 101, तेहरान, द लूमिंग टावर इत्यादि. नेटफ्लिक्स पर इजराइल की ही एक वेब सीरीज चर्चा में है ‘ब्लैक स्पेस’. स्कूल में घुस कर गोलीबारी करने की अमेरिकी प्रथा जब इजराइल के स्कूल में पहुंचती है तो पूरा प्रशासन कैसे डगमगा जाता है, ये इस वेब सीरीज की मूल कहानी है.

जिन समाजों में परिवार का महत्व काम हो गया है, और माता-पिता और बच्चों के बीच एक खामोश सी दूरी आ गयी है, वहां बच्चों का गलत राह पकड़ना बहुत आसान है. इन बच्चों का का भावनाओं के स्तर पर कोई विकास हो पाता है और न ही ये बौद्धिक तौर पर इतने मजबूत होते हैं कि दुखों और समस्याओं को ठीक से समझ कर डील कर सकें. अमेरिका में अक्सर ऐसा होता है कि एक सरफिरा बंदूकधारी, किसी स्कूल में घुस के अंधाधुंध फायरिंग करता है. कुछ लोग मारे जाते हैं और फिर पुलिस आ कर उस अपराधी को ढेर कर देती है. जांच करने पर पता चलता है कि इस हमलावर का मानसिक संतुलन उसके बचपन की बजह से बिगाड़ा हुआ होता है. ऐसा कोई शख्स, हमारे बीच रहता है, हमारे साथ ही रहता है लेकिन हम फिर भी उसके इस असंतुलन को तवज्जो नहीं देते.

रामी देवीदी (गुरी अल्फी) एक सनकी पुलिस वाले हैं जिन्हें हर केस अपने तरीके से सुलझाना पसंद हैं. उनकी पत्नी गर्भवती है और एक आंख खराब हो चुकी है, इसलिए नयी ऐक्रेलिक की आंख लगवाने के लिए डॉक्टर कहता है. शहर के हेरिटेज हाई स्कूल में 4 अपराधी सर पर यूनिकॉर्न का मास्क लगा कर असेंबली में आते हैं और अंधाधुंध गोलियां चला देते हैं. इस वजह से कुछ स्टूडेंट्स मर जाते हैं और कुछ घायल हो जाते हैं. रामी इसी स्कूल का छात्र है इसलिए वो आकर जांच शुरू करता है.

पहला शक फिलिस्तीनी कामगारों पर जाता है और उन्हें गिरफ्तार कर लिए जाता है. किसी सबूत के न मिलने की वजह से रामी को शक होता है कि गोलियां, स्कूल के छात्रों ने चलाई हैं. इसके बाद की कहानी बेहद लम्बी है. बीच बीच में रोमांच के कुछ पल आते हैं मगर औसत से रफ़्तार धीमी होने की वजह से 4थे एपिसोड के बाद कहानी खिंचती हुई नज़र आती है. ब्लैक स्पेस नाम की एक एप होती है जिस पर स्कूल के छात्र इस अपराध को लेकर ख़ुफ़िया चैटिंग और वीडियो शेयरिंग करते हैं, और रामी किसी तरह इस ग्रुप चैट का हिस्सा बन कर रहस्य सुलझाने की कोशिश करता है. क्या वो ये किस्सा सुलझा पाता है, इसके लिए पूरे 4 एपिसोड और लगाए गए हैं.इस सीरीज से सम्बंधित कुछ ख़ास बातें. सीरीज बहुत ही अच्छे विषय पर बनायी गयी है. हालाँकि स्कूल में गोलीबारी की घटना हमारे देश में नहीं होती मगर स्कूल में आजकल होने वाले कुछ आपराधिक कामों का भी इसमें लेखा जोखा है. ड्रग्स बड़ी सामन्य बात है लेकिन इस में प्रतिबंधित दवाओं की खुला आम बिक्री एक बड़ा विषय है. कंप्यूटर की स्क्रीन के सामने ज़िन्दगी गुज़ारने वाली इस पीढ़ी की शराब, सिगरेट और ख़ुफ़िया अड्डों पर पार्टी करने की आदत को बड़े ही सटीक अंदाज़ में कहानी में पिरोया है.

सीरीज पूरी अंग्रेजी में है इसलिए गालियों का प्रभाव कम पड़ता है. दूसरी ओर, पुलिस किस तरीके से कानून से छिपा कर लगभग बालिग़ लड़कों से पूछ ताछ करती है और सच उगलवाने का प्रयास करती है, ये कहानी में बड़े ही अजीब तरीके से दिखाया गया है. संदिग्ध बच्चों के माता पिता की उनके प्रति बेरुखी थोड़ी विचलित करने वाली है. एक जगह शहर के मेयर अपने बेटे से गले मिलने की ख्वाहिश जाहिर करते हैं लेकिन उनका बेटा उन्हें झिड़क देता है. एक विचारणीय पल, जहाँ पिता पुत्र के बीच की दूरी को एक ही डायलॉग से समझा दिया गया है. बार बार जो बात इस कहानी में गौर करने वाली है वो है टूटते परिवार, माता-पिता का अपने बच्चों से दूर होते जाना। निर्देशक ने गोलीबारी में मृत बच्चे की माँ का अपने बेटे के खिलाफ मिल रहे सबूतों को मिटाने की कोशिश करना दिखाया है, लेकिन वो पल प्रभाव छोड़ने के बजाये रामी की थ्योरी सही साबित करने में जाया हो जाता है.

सीरीज में मानसिक स्वास्थ्य की और बड़े ही अप्रत्याशित तरीके से ध्यान खींचा गया है. रामी का काम के प्रति जूनून उसके बचपन की एक घटना की वजह से जन्मा है और उसमें आक्रोश भी उसी वजह से भरा दिखाया गया है. अपना काम निकलवाने के लिए आज की पीढ़ी की लड़कियों को किसी के साथ सोना पड़े तो वो चूकती नहीं हैं, ये बात इस कहानी में बार बार सामने आती है. हर किरदार के कुछ न कुछ राज़ हैं जो समय समय पर कहानी में झांकते नज़र आते हैं. निर्देशक किसी को सही या गलत ठहराने के बजाये, उनके राज़ बड़े ही नाज़ुक अंदाज़ में प्रस्तुत करता है. यूरोपियन सिनेमा की ही तरह हर एक सीन किसी न किसी बड़ी बात का संकेत होता है. किरदारों की आदत उनके चरित्र का बयान तो कर देती है लेकिन उनकी ऐसी आदतों की वजह छुपी ही रहती है.

निर्देशक ओफिर लोबेल को अच्छा ख़ासा अनुभव है और लेखक अनात गफनी और सहर शावित के साथ मिल कर उन्होंने इस थ्रिलर को एक नया स्टाइल देने की कोशिश की है लेकिन पहले एपिसोड के बाद जिस तरीके से कहानी फ़ैल जाती है और चौथे एपिसोड तक तो दिलचस्पी ख़तम हो जाती है, लगता है इसमें ढेर सारे किरदार डालने की ज़रुरत नहीं थी. रामी की प्रेग्नेंट पत्नी जो रामी के काम के प्रति जूनून से परेशान है, एक पुलिस चीफ है, एक महिला पुलिसकर्मी जो रामी के साथ काम करती है और रामी का उसके साथ एक छोटा सा अफेयर, ढेरों स्टूडेंट और उनको सबको जोड़ती एक कहानी, सीरीज को बोरिंग बना देती है. मुख्य बात स्कूल के प्रिंसिपल के मुंह से सुनने को मिलती है लेकिन तब तक सीरीज बहुत लम्बी खिंच चुकी होती है. जिस वजह से छात्र इस आपराधिक घटना को जस्टिफाई करते हैं, वो कारण बहुत ही कमज़ोर नज़र आता है. फिलिस्तीन के शरणर्थियों के प्रति पुलिस और व्यवस्था की घृणा का एक छोटा सा नमूना भी कहानी में शामिल है.

इजराइल से आने वाली सीरीज मोसाद या तेहरान देख कर धीमी रफ़्तार वाले थ्रिलर वेब सीरीज देखने का मन बना रहता है. ब्लैक स्पेस से इस मामले में बड़ी चूक हो गयी है. इजराइल एक बड़ा ही विचित्र लेकिन लोक लुभावन किस्म का देश है, वहां के रहवासियों की मानसिक स्थिति और उनका बदला लेने का व्यवहार समझना हो तो ब्लैक स्पेस में बड़े ही अच्छे से समझाया गया है. थोड़ा थोड़ा सब कुछ परोस कर जो थाली बनायीं गयी है, स्वाद होने के बावजूद वैरायटी और ढेर सारे पकवानों से बोझिल हो जाती है. अगर आप धीमी रफ्तार वाले थ्रिलर देखना पसंद करते हैं तो आपको ब्लैक स्पेस शर्तिया पसंद आएगी. कोई गैजेट की बाजीगरी, जासूसी के नए तरीके, पूछताछ के लिए कोई मनोवैज्ञानिक तकनीक से इस सीरीज को बचा के रखा गया है और यही बात लेखकों और निर्देशकों को भीड़ से अलग बनाए रखती है.

Source link


Share Now To Friends!!

Leave a Comment