FILM REVIEW: बहुत पैनी, बहुत धारदार है ये छोटी सी ‘छुरी’

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एक आम सा परिवार है. मियां-बीवी और दो बच्चे. संडे का दिन है, नाश्ता सूप और जूस की तैयारी में पत्नी बिजी है. लेकिन पति का ध्यान सिर्फ फोन में लगा हुआ है. पत्नी जानती है कि पति का दिल कहीं और लग गया है. सिर्फ पत्नी ही नहीं, बच्चे भी जानते हैं.

लेकिन पत्नी एक कदम उठाती है. ना मारपीट ना कोई लड़ाई-झगड़ा. सिर्फ बातचीत. उस दूसरी उस औरत से बातचीत और एक सौदा. इस बीच एक राज खुलता है और दूसरी औरत के घर से पत्नी मुस्कुराते हुए निकलती है और अपने घर चली जाती है.

टिस्का चोपड़ा, अनुराग कश्यप आयर सुरवीन चावला. शॉर्ट फिल्म ‘छुरी’ है तो सिर्फ 12 मिनट से थोड़ी ज्यादा, लेकिन कई मायनों में बहुत खास है. इस फिल्म का निर्देशन मानसी जैन ने किया जिनकी पिछली शॉर्ट फिल्म ‘चटनी’ में भी टिस्का चोपड़ा ने कमाल की एक्टिंग की थी.

इस फिल्म की कहानी एक बेचारी सी औरत की है जो ये बेचारगी का चोंगा उतारती है और अपने लिए परिस्थितियां बेहतर बनाती है. लेकिन इस बातचीत से एक समस्या है. वही समस्या जो ‘चटनी’ से थी, वही समस्या जो ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्का’ में कोंकणा सेनशर्मा के किरदार से थी. पति की बेवफाई के लिए सवाल-जवाब भी तो पति से किए जाने चाहिए, सिर्फ उस दूसरी औरत से ही क्यों?खैर, पति बेवफा तो है ही, लेकिन औरत की बेवफाई पर मॉरल सवाल पूछने का हक खुद का ही समझता है. फिल्म बहुत कम बातों में, कम शब्दों में और कम समय में बहुत कुछ कह जाती है. लेकिन फिर भी इसकी तुलता 2016 में रिलीज हुई शॉर्ट फिल्म ‘चटनी’ से करना सही नहीं है. जहां ‘चटनी’ में एक तीखापन था, छुरी की धार थोड़ी कमजोर है.

अनुराग कश्यप एक बेवफा पति की भूमिका में दिखे हैं. इफ छोटी सी फिल्म में भी उनकी एक्टिंग स्किल नजर आई है. हालांकि उनके पास इस फिल्म में करने के लिए वाकई कुछ भी नहीं है. निर्देशक को उन्हें और अच्छे से इस्तेमाल करना चाहिए था.

टिस्का चोपड़ा अपने किरदार में हमेशा ही पूरी तरह से उतर जाती हैं, चाहे फिल्में हों या शॉर्ट फिल्में. बीते लंबे अरसे से टिस्का ने शॉर्ट फिल्मों को मेन स्ट्रीम में लाने के लिए बहुत काम किया है जिसका असल अब साफ दिखने लगा है.

टिस्का चोपड़ा की एक्टिंग कमाल की है

फिर आती हैं सुरवीन चावला. चाहे ‘अग्ली’ हो, ‘पार्च्ड’ या फिर ये ‘छुरी’, सुरवीन के किरदार बगावती या लीक से हटकर होते हैं. अपने प्रेमी की पत्नी से आमना-सामना होने पर उनकी घबराहट, उनकी झिझक और उनकी सकपकाहट इस शॉर्ट फिल्म में साफ दिखती है.

फिल्म की शूटिंग दो लोकेशन्स पर हुई है, जिनमें से अधिकतर हिस्सा सुरवीन चावला के फ्लैट पर फिल्माया गया है. कम बजट सिनेमा में इनडोर लोकेशन खासतौर पर प्रयोग किए जाते हैं. निर्देशन भी बेहतरीन है लेकिन अनुराग कश्यप को स्क्रीन पर और देखने की इच्छा इच्छा ही रह जाती है.

फिल्म ‘छुरी’ एक स्मार्ट फिल्म है, समझदारी से भरी हुई और पैने अंदाज में एडिट की गई. 100, 200 करोड़ कमाने वाली स्लैपस्टिक फिल्मों के बीच ‘छुरी’ जैसी फिल्मों के चलते दर्शक अच्छा कंटेंट देखने इंटरनेट का ही रुख करने लगे हैं.

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