FILM REVIEW: बहुत बोझिल है अनुपम खेर की ‘रांची डायरीज’

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फिल्म रांची डायरीज का रिव्यू

फिल्म रांची डायरीज का रिव्यू

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 8, 2017, 10:37 AM IST

बीते कुछ समय से छोटे शहरों के सपने बॉलीवुड के लिए एक कमाऊ जरिया बन गए हैं. इस लिस्ट में निल बटे सन्नाटा, दंगल और बरेली की बर्फी जैसी फिल्में शामिल हैं. इन फिल्मों ने ना सिर्फ बॉक्स-ऑफिस पर अच्छी कमाई की है, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे कंटेंट के अभाव को भी दूर किया है.

अब इस फेहरिस्त में अगला नाम है ‘रांची डायरीज’ का. लेकिन एक बेवजह सी कहानी और एवेरज एक्टिंग की वजह से यह फिल्म दर्शकों पर कोई प्रभाव नहीं डाल पाती और इंटरवल से पहली ही बोझिल हो जाती है.

इस फिल्म के साथ अनुपम खेर फिल्म प्रोडक्शन की दुनिया में 12 साल बाद वापसी कर रहे हैं. इससे पहले उन्होंने ‘मैंने गांधी को नहीं मारा’ जैसी बेहतरीन फिल्म बनाई थी. लेकिन इस बार वो कुछ खास कमाल नहीं कर पाए.

रांची शहर की रहने वाली गुड़िया के सपने बहुत बड़े हैं और वो मुंबई जाकर हीरोइन और गायिका बनना चाहती है. लेकिन उसके पास पैसे नहीं है. पैसों के लिए वो और उसके दोस्त मिलकर बैंक लूट लेते हैं.इस फिल्म में अनुपम खेर एक्टिंग भी कर रहे हैं. एक करप्ट नेता के रूप में उनके किरदार में कोई नयापन नहीं है.

जिमी शेरगिल को स्क्रीन पर देखना अच्छा लगता है और पूरी फिल्म में एक वही हैं जो किरदार में पूरी तरह से उतरे हुए नजर आते हैं.

फिल्म में गाने कभी भी शुरू हो जाते हैं और फिल्म को रास्ते से भटका देते हैं.

सौंदर्या शर्मा, ताहा शाह और हिमांश कोहली की एक्टिंग कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाती. रांची की पृष्ठभूमि में भी शहरीकरण ज्यादा नजर आता है.

कुल मिलाकर अगर आपके पास इस वीकेंड कोई काम नहीं है, तब भी यह फिल्म आप अपनी रिस्क पर ही देखें.

हम इस फिल्म को हम 1 स्टार दे रहे हैं.

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डिटेल्ड रेटिंग

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