FILM REVIEW: बेवकूफियां, कंफ्यूजन और ढाई किलो के हाथ का तड़का ‘पोस्टर बॉयज’

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‘पोस्टर बॉयज’ मतलब देओल ब्रदर्स की पर्दे पर कॉमिक वापसी. पोस्टर बॉयज मतलब श्रेयस तलपड़े का निर्देशन की दुनिया मे डेब्यू. पोस्टर बॉयज मतलब कॉमेडी के बीच बहुत नाटकीय ढंग से सोशल मैसेज देने की कोशिश.

यह कोशिश कितनी सफल हुई है यह कह पाना मुश्किल है क्योंकि बीच-बीच में हंसी के कुछ मौकों के अलावा यह फिल्म काफी बोझिल लगती है.

कहानी:1.5 स्टार

‘पोस्टर बॉयज’ इसी नाम की एक मराठी फिल्म का हिंदी रीमेक है. एक गांव के 3 आदमी प्रशासन और सरकार की लचरता के कारण नसबंदी के पोस्टर पर नजर आ जाते हैं. इसके बाद उनके घरों में एक के बाद एक मुसीबतें आने लगती हैं. गांव के लोग उनका और उनकी मर्दानगी का मजाक उड़ाते हैं. खुद को सही साबित करने और अपने साथ हुई इस नाइंसाफी का बदला लेने के लिए वो एक अनशन करते हैं. अनशन, बिना कपड़े पहने.

कहानी का यह हिस्सा 2011 में आई नितीश तिवारी की बाल-फिल्म ‘चिल्लर पार्टी’ से उठाया हुआ लगता है. 

इस कहानी के साथ कई समस्याएं हैं. बेहतरीन कॉमेडी के इस दौर में यह फिल्म बचकाने जोक्स और 80-90 के दौर का कंटेंट परोसती है. नसबंदी और लड़का-लड़की एक समान जैसे मैसेज फिल्म की कहानी के माध्यम से नहीं, बल्कि नुक्कड़ नाटक की तरह नगाड़े पीट के दिए जाते हैं.

लेकिन ये फिल्म सनी देओल को एक ट्रिब्यूट देती हुई लगती है. ‘बलवंत राय के कुत्तों’, ‘तारीख पे तारीख’ और ‘ढाई किलो का हाथ’ वाले उनके कालजयी डायलॉग सुनना मजेदार अनुभव हो सकता है.

कहानी के लिए हम इस फिल्म को 1.5 स्टार दे रहे हैं.

एक्टिंग: 2

सनी देओल अपने जट्ट अवतार में फिट बैठे हैं. गांव के इस चौधरी को पाउट वाली सेल्फी लेने की लत फिल्म में मॉडर्न तड़का लगाती है.

श्रेयस तलपड़े स्लैपस्टिक कॉमेडी में माहिर हैं और गोलमाल वाला उनका रोल यहां भी नजर आया है. बॉबी देओल को एक बेचारे टीचर के रूप में देखना और उनकी बातें सुनना आपको गुदगुदा सकता है. सोनाली कुलकर्णी चौधरी की पत्नी के रूप में ठीक-ठाक लगी हैं. बाकी कलाकारों की एक्टिंग औसत है और फिल्म को आगे बढ़ने में मदद करती है.

कलाकारों की औसतता के कारण हम इस फिल्म की एक्टिंग को 2 स्टार दे रहे हैं.

सिनेमाटोग्राफी: 2 स्टार

फिल्म के रंग बहुत अच्छे हैं. गांव की पृष्ठभूमि में बनी इस फिल्म में जितनी गुंजाइश थी, उस हिसाब से जरा फीकी सच्चाई दिखाई गई है. फिल्म के सेट थिएटर के सेट ज्यादा लगे हैं. इस वजह से हम सिनेमाटोग्राफी के लिए फिल्म को 2 स्टार दे रहे हैं.

कुल मिलाकर: 2 स्टार

अगर आप भाषण देती हुई फिल्मों से आजिज आ चुके हैं और कॉमेडी के नाम पर बचकानी हरकतें नहीं देखना चाहते तो यह फिल्म मत देखिए.

लेकिन अगर आपको सनी देओल को हैंडपम्प उखाड़ते देखने की यादें ताजा करनी हैं तो आपको यह फिल्म पैसा वसूल लगेगी.

कुल मिलाकर हम इस फिल्म को 2 स्टार दे रहे हैं.

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