FILM REVIEW: रोमांस और कॉमेडी के तड़के के साथ एक फील गुड फिल्म है ‘शेफ’

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अगर आप तेल में तल रही आलू की चाट देखकर उस ओर खिंचे चले आते हैं, भटूरों का स्वाद आपको मीलों की यात्रा करवा देता है और रसम, अप्पम का जिक्र ही आपकी भूख बढ़ा देता है, तो सैफ अली खान की फिल्म ‘शेफ’ देखकर आपके पेट में चूहे कूद सकते हैं.

लेकिन यहां स्वाद की कुछ कमी सी लगती है. सैफ अली खान के लीड रोल वाली इस फिल्म का टाइटल ‘शेफ’ जरूर है, लेकिन मसाले कुछ फीके, कुछ अधूरे रह गए.

जॉन फेव्रो की हॉलीवुड की फिल्म ‘शेफ’ का हिन्दुस्तानी रीमेक ओरिजिनल फिल्म से ज्यादा इमोशन्स और देश की मिट्टी के इर्द-गिर्द है. और हां, फिल्म में एक सरप्राइज के तौर पर मिलिंद सोमन भी हैं!

कहानी:न्यूयॉर्क में एक हिन्दुस्तानी रेस्टोरेंट का शेफ रौशन कालरा से दर्शकों की पहली मुलाक़ात एक घमंडी, रूड और कुछ परेशान इंसान के रूप में होती है. 40 साल का एक तलाकशुदा यह आदमी अपनी जिंदगी का मकसद भूल बैठा है.

एक्स-पत्नी और बेटा भारत में रहते हैं और रौशन अपने बेटे से बहुत दूर हो चुका है. नौकरी छूट जाने के बाद रौशन वापस भारत आता है, खुद के भीतर झांकने के कई मौकों के बाद वो अपने बेटे से साथ एक फूड ट्रक लेकर कोच्ची से दिल्ली की यात्रा करता है.

इसी बीच दर्शकों को पता चलता है कि दिल्ली के चांदनी चौक का रहने वाला रौशन कालरा बचपन से ही अपनी नाक के हाथों मजबूर था. पिताजी नहीं चाहते थे कि वो बावर्ची बने, इसलिए रौशन घर से भाग गया.

लेकिन न्यूयॉर्क में एक अच्छी नौकरी और हर महीने अकाउंट में आने वाली मोटी सैलेरी के बाद उसका पैशन कहीं खो गया. इसी पैशन की तलाश पूरी होती है अपने बेटे के साथ एक फूड ट्रक पर.

कहानी जाहिर सी बात है हॉलीवुड फिल्म ‘शेफ’ से ली गई है लेकिन उसमें पिताजी से रौशन का मनमुटाव और साउथ और नार्थ का अंतर भी जोड़ लिया गया है.

एक बात जो खटकती है वो ये कि कहने को तो सैफ यानी रौशन कालरा एक बहुत बड़ा शेफ है, लेकिन पूरी फिल्म में वो सिर्फ पास्ता ही बनाता दिखा है. भारत आकर भी वो सिर्फ रोटी पिज्जा के अलावा कुछ नहीं बनाता.

इस कहानी में 2 बाप हैं, 2 बेटे हैं और इन 3 लोगों की आपसी समझ का कच्चा पक्का नमूना है. बस इस कहानी में एक लय की कमी है. इसलिए फिल्म की कहानी को हम 2.5 स्टार दे रहे हैं.

एक्टिंग:

सैफ अली खान इस फिल्म में अपने रोल के हिसाब से पूरी तरह ढल गए हैं. पूरी फिल्म में उन्होंने बरमूडा पैन्ट्स पहने हैं तो आजकल फिल्म से बाहर अन्य इवेंट्स में भी सैफ शॉर्ट्स में ही नजर आते हैं. 40 साल के तलाकशुदा आदमी के रूप में उन्होंने खुद को काफी एक्सप्लोर किया है. फिल्म में उनकी एक्स-पत्नी के किरदार में दक्षिण भारतीय फिल्मों की एक्ट्रेस पद्मप्रिया जानकीरामन हैं. पद्मप्रिया बहुत खूबसूरत हैं और उनकी एक्टिंग भी उनकी आंखों की ही तरह बहुत कमाल की है.

लेकिन अपनी नेचुरल एक्टिंग से अगर कोई प्रभावित करता अहि तो वो है सैफ और पद्मप्रिया के बेटे की भूमिका में स्वर कांबले. स्वर अभी से इतने मंझे हुए कलाकार लगते हैं कि उन्हें स्क्रीन पर देखना एक अच्छा अनुभव है. पापा सैफ के साथ उनकी केमिस्ट्री बहुत नेचुरल लगती है.

मिलिंद सोमन एक लंबे अरसे बाद किसी फिल्म में नजर आए हैं. हालांकि फिल्म में उनके लिए कुछ खास नहीं है, लेकिन जितनी भी देर वो स्क्रीन पर रहते हैं, अपनी जगह बनाए रखते हैं.

अन्य सहयोगी कलाकारों की भूमिका भी बहुत बेहतरीन है. एक्टिंग के लिए इस फिल्म को हम 3 स्टार दे रहे हैं.

सिनेमेटोग्राफी:

शेफ एक खूबसूरत फिल्म है. लोकेशन, एक्टिंग और एक्टर्स, सभी को देखना एक अच्छा अनुभव है. दक्षिण भारत की खूबसूरती को इस फिल्म में अच्छे से इस्तेमाल किया गया है. फिल्म का निर्देशन भी अच्छा है, बस कहीं-कहीं फिल्म का कुछ सिरा छूट जाता है.

सिनेमेटोग्राफी के लिए हम इस फिल्म को 3 स्टार दे रहे हैं.

कुल मिलाकर:

कुल मिलाकर यह एक फील गुड फिल्म है. कॉमेडी और रोमांस के तड़के के साथ सैफ अली खान एक अच्छे शेफ से ज्यादा एक अच्छे पिता बनकर उभरते हैं. यही शायद इस फिल्म का सार है.

कुल मिलकर हम इस फिल्म को 3 स्टार दे रहे हैं.

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