FILM REVIEW: लगभग 50 साल पुरानी ‘इत्तेफाक’ से अलग और बेहतर है ये फिल्म

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फिल्म इत्तेफाक का रिव्यू

जानिए कैसी है फिल्म इत्तेफाक

  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 3, 2017, 3:14 PM IST

सबसे पहली बात हम बताना चाहेंगे कि सिद्धार्थ मल्होत्रा और सोनाक्षी सिन्हा की ‘इत्तेफाक’ राजेश खन्ना और नंदा वाली इत्तेफाक का रीमेक नहीं है. दरअसल यह फिल्म 1969 में रिलीज हुई ‘इत्तेफाक’ से सिर्फ बेसिक प्लॉट ही लेती है लेकिन इसके ट्विस्ट और सस्पेंस बहुत अलग हैं. यह कहता ठीक ही होगा कि 2017 में रिलीज हुई ‘इत्तेफाक’ लगभग 50 साल पहले की ‘इत्तेफाक’ से बेहतर है.

निर्देशक अभय चोपड़ा की इस फिल्म को करन जौहर और शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउसेज ‘धर्मा प्रोडक्शन’ और ‘रेड चिलीज फिल्म्स’ ने प्रोड्यूस किया है. 107 मिनट की इस फिल्म का हर एक सीन कसा हुआ है और एक भी सीन मिस करने से फिल्म का मजा किरकिरा हो सकता है.

शुरू से आखिर तक दर्शक फिल्म से बंधे रहते हैं. फिल्म देखते हुए आपके दिमाग में सिर्फ यही चलता है कि विक्रम पर भरोसा किया जाए या माया पर. लेकिन फिल्म के खत्म होने पर एक ऐसा सच पता चलता है जिसकी कल्पना ही नहीं की जा सकती.

यह एक डबल मर्डर की कहानी है. विक्रम नाम के एक लेखक पर आरोप है कि उसने अपनी पत्नी का मर्डर किया और उसके बाद माया के पति को भी मार डाला. माया पर भी इन दो खूनों का इल्जाम है.अक्षय खन्ना पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका में इस मिस्ट्री को हल करते नजर आते हैं. जहां तक एक्टिंग का सवाल है, फिल्म के तीनों ही कलाकार अपने-अपने रोल में इतने सटीक बैठे हैं कि इससे फिल्म का मजा और बढ़ जाता है.

हालांकि फिल्म में ऐसे भी कुछ पहलू हैं जो बे-सिरपैर के लगते हैं. लेकिन कुल मिलाकर यह फिल्म बहुत समझदारी से बनाई हुई फिल्म लगती है. वैसे बॉलीवुड में थ्रिलर और मर्डर मिस्ट्री के नाम पर ज्यादा फिल्में हैं भी नहीं. ऐसे में ‘इत्तेफाक’ इस कमी को कुछ हद तक पूरा जरूर करती है.

हम इस फिल्म को 3 स्टार दे रहे हैं.

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डिटेल्ड रेटिंग

कहानी:
स्क्रिनप्ल:
डायरेक्शन:
संगीत:





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