FILM REVIEW: ‘शब’ दर्शकों को छोड़ देती है कई सवालों के साथ

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निर्माता निर्देशक ओनिर इससे पहले ‘माई ब्रदर निखिल’, ‘चौरंगा’ और ‘बस एक पल’ जैसी फिल्में बना चुके हैं और उनकी फिल्मों को पारिवारिक मनोरंजन की फिल्म नहीं माना जाता है.

‘शब’ भी कोई अपवाद नहीं है और ड्रामा, रोमांस और सस्पेंस से भरी इस फिल्म में शहरी युवाओं के प्यार और उनकी ज़िंदगियों में होने वाली दिक्कतों को दर्शाया गया है.

ओनिर हमेशा से समाज की मान्यताओं के लिए ‘बोल्ड’ माने जाने वाले विषयों पर फिल्में बनाते आए हैं और इस फिल्म में भी वो वेश्यावृत्ति, समलैंगिक संबंधो और विवाहेत्तर संबंधों की बात करते हैं.

कहानी –  1. 5 स्टार फिल्म की कहानी पर लेखक की मेहनत साफ दिखती है लेकिन फिल्म को छोटा रखने के उद्देश्य से फिल्म अपने किरदारों के साथ इंसाफ़ नहीं कर पाती. ‘शब’ में मौजूद हर किरदार की अपनी एक कहानी है और ये कई शॉर्ट फिल्मों का संकलन लगती है. हालांकि ये स्टाइल देखने में नयापन और रोमांचक लगता है लेकिन दर्शकों के लिए ये कहीं कहीं थोड़ा कन्फयूजन वाला भी हो जाता है.

फिल्म में कई दृश्य हैं जो सेंसर की भेंट चढ़ें हैं.

मोहन (आशीष बिष्ट) मॉडल बनना चाहता है और इसके लिए कोशिश कर रहा है. एक मॉडलिंग एजेंसी की मालकिन सोनल मोदी (रवीना टंडन) अपने वैवाहिक जीवन से खुश नहीं है और और मोहन को अपने साथ सोने के बदले मॉडलिंग का प्रलोभन देती है.

फिल्म का दूसरा किरदार है रैना या आफिया का किरदार जो एक वेट्रेस है और छिपकर वेश्यावृत्ति कर रही है, रैना का फ्रेंच पड़ोसी बेनोइट (साइमन फ़्रेने) एक समलैंगिक युवक है और किसी जीवनसाथी की तलाश में है.

अपनी अपनी सीक्रेट ज़िंदगिया जी रहे और आपस में घुले मिले इन किरदारों को पर्दे पर एकसाथ लाने में हर किरदार के अंत पर थोड़ी थोड़ी कमी रह जाती है.

अभिनय –  3 स्टार

रवीना टंडन का अनुभव अब कैमरे पर दिखता है और वो अपने रोल के बखूबी निभाती है, वो बोल्ड दृश्यों में बोल्ड और इमोशनल दृश्यों में टूटी हुई दिखती हैं.

Film Review, Shabबांग्ला फिल्मों से बॉलीवुड में आई अर्पिता चटर्जी इस फिल्म में बंगाली महिला का ही किरदार निभा रही हैं और अपने किरदार के लिए वो सही चुनाव लगती हैं.फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू कर रहे आशीष बिष्ट उतना प्रभावित नहीं करते और शायद फिल्म की कमजोर कड़ी भी है, कहीं न कहीं

ओनिर के अच्छे दोस्त संजय सूरी भी रवीना के पति की भूमिका में एक कैमियो कर रहे हैं जो वो ठीक ठीक निभा कर निकल जाते हैं.

कुल मिलाकर – 2 स्टार

इस फिल्म का फिल्मांकन अच्छा है और फिल्म की लाइटिंग इसे बेहद मॉर्डन लुक देती है. फिल्म का संगीत मिथून ने दिया है और ये अच्छा बन पड़ा है, फिल्म के गाने ‘ओ साथी’ और ‘अवारी’ दर्शकों को पसंद आएंगे.

फिल्म में सस्पेंस एलिमेंट अच्छा है, लेकिन फिल्म की गति युवा दर्शकों को परेशान कर सकती है. सिनेमा का अगर आपको शौक है तो आपको ये फिल्म अच्छी लग सकती है लेकिन अगर आप मनोरंजन के लिए सिनेमाहॉल जा रहे हैं तो ‘शब’ शायद आपके लिए नहीं बनी है.

फिल्म रिव्यूअर – शिल्पा गुप्ता

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