International Yoga Day 2021: योग दिवस पर ये आसन रखेंगे आपको हेल्दी

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International Yoga Day 2021: आज हम 7वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रहे हैं. भारत की इस विद्या को दुनिया भर के देश इसके अनगिनत फायदों के चलते अपना रहे हैं. योग (Yoga) न केवल आपको शरीरिक रूप से फिट रखता है बल्कि आपको मानसिक रूप से भी मजबूत बनाता है. कोरोना काल (Corona Time) में योग बेहद फायदेमंद रहा है. योग बेहद सौम्य प्रैक्टिस है जोकि मन और व्यक्तित्व पर गहरा प्रभाव डालता है. आपको इसके साथ ही अपने आहार, विहार और निद्रा का पूरा ध्यान रखना है. आइए करें योग और बनें फिट और हेल्दी…

चेयर पोज: चेयर पोज उत्कटासन, कुर्सी आसन (Chair Pose) के नाम से भी जाना जाता है. इसे करने के लिए योग मैट पर अपने दोनों पैरों को फैलाकर खड़े हो जाएं. अब अपने दोनों हाथों को आगे की ओर फैलाएं. ध्‍यान रखें कि आपके हाथ सीधे रहें और कुहनियां मुड़ने न पाएं. अब दोनों घुटनों को धीरे-धीरे मोड़ें. जैसे आप किसी काल्पनिक कुर्सी पर बैठे हुए हों. इस दौरान आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए. अब लंबी सांसें लें. इस स्थिति में करीब एक मिनट तक बने रहें.

ताड़ासन: सबसे पहले आप खड़े हो जाएं और अपने कमर और गर्दन को सीधा रखें. अब आप अपने हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे धीरे पूरे शरीर को खींचें. खिंचाव को पैर की उंगली से लेकर हाथ की उंगलियों तक महसूस करें. इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाए रखें ओर सांस ले सांस छोड़ें. फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ और शरीर को पहली अवस्था में लेकर आएं. इस तरह से एक चक्र पूरा होता है. ताड़ासन योग पूरे शरीर को लचीला बनाता है. यह एक ऐसा योगासन है जो मांसपेशियों में काफी हद तक लचीलापन लाता है. यह शरीर को हल्का करता है और आराम देता है. इसके अलावा शरीर को सुडौल और खूबसूरती भी प्रदान करता है. शरीर की अतिरिक्त चर्बी को पिघालता है और आपके पर्सनैलिटी में नई निखार लेकर आता है.

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वृक्षासन: वृक्षासन करने के लिए सीधे खड़े होकर दायें पैर को उठा कर बायें जंघा पर इस प्रकार रखें की पैर का पंजा नीचे की ओर तथा एड़ी जंघा के मूल में लगी हुई हो। दोनों हाथों को नमस्कार की स्थिति में सामने रखें. इस स्थिति में जितना हो सके बने रहने के बाद इसी प्रकार दूसरे पैर से अभ्यास करें। ये घुटने, एड़ियों और गठिया के दर्द में आराम देता है. तनाव, डिप्रेशन में फायदेमंद हैं.

त्रिकोणासन: त्रिकोणासन के अभ्यास में शरीर के कई अंग शामिल होते हैं जिससे उन्हें अच्छे से स्ट्रेच किया जा सकता है. हिप्स, कमर, बाजू, कंधे, हैम्स्ट्रिंग, काव्स, पैर और फोरआर्म्स की मसल्स इस आसन के अभ्यास के दौरान काम करती हैं. यह योग मुद्रा आपके बॉडी पोस्चर को बेहतर करने में मदद करता है. यह आसन मांसपेशियों को फैलाने और नियमित शारीरिक फंक्शन में सुधार करने के लिए जाना जाता है.

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दंडासन: दंडासन को करने के लिए आप सबसे पहले योगा मेट को फर्श पर बिछा के उस पर बैठ जाएं. दोनों पैरों को अपने शरीर के आगे फैलाएं और दोनों को पास-पास रखें. दोनों पैरों की उंगलिया आपकी ओर झुकी और खिचीं रहें. अपनी जांघों और एड़ी को फर्श में दबाएं. अपने दोनों हाथों को सीधे और हथेलियों को जमीन पर रखें. हाथ दोनों कूल्हों के पास में रहने चाहिए. अपनी रीढ़ की हड्डी और गर्दन को सीधा रखें. अपनी छाती को ऊपर उठाएं और अपने कॉलरबोन को फैलाने के लिए अपने कंधों को थोड़ा सा खींचें. सामने की ओर देखें और अपनी सांस को सामान्य रखें. आप इस दंडासन को 20 सेकंड से एक मिनट तक करते रहें. आप इस आसन को अपनी क्षमता के अनुसार भी कर सकते हैं.दंडासन, योग मुद्रा का एक सरल आसन है. यह आत्म-जागृति की ऊर्जा के लिए मार्ग बनाता है. इसलिए दंडासन को शक्ति और अच्छे रूप को बढ़ावा देने के लिए आदर्श आसन माना जाता है.

वज्रासन: वज्रासन करने के लिए दोनों पैरों को मोड़कर वज्रासन में बैठ जाएं. दोनों हाथों को जांघ पर रखें और सांस को अंदर और बाहर लें. ऐसा 10 बार करें. लेकिन याद रहे कि इस दौरान आंखें बंद ही रहें. आप खाना खाने के बाद भी ये आसन कर सकते हैं.

उष्ट्रासन: अपने योग मैट पर घुटने के सहारे बैठ जाएं और कुल्हे पर दोनों हाथों को रखें. घुटने कंधो के समानांतर हो तथा पैरों के तलवे आसमान की तरफ हो. सांस लेते हुए मेरुदंड को खींचे जैसे कि नाभि से खींचा जा रहा है. गर्दन पर बिना दबाव डालें बैठे रहें. इसी स्थिति में कुछ सांसे लेते रहे. सांस छोड़ते हुए अपने प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं. हाथों को वापस अपनी कमर पर लाएं और सीधे हो जाएं.

मकरासन: शांत अवस्था में लेटने की मुद्रा ही मकरासन कहलाती है. इस आसन का अभ्यास करते समय मगरमच्छ की आकृति में ही एकदम शांत मुद्रा में जमीन पर लेटना पड़ता है.

भुजंगासन: भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है. इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है. ये आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है.

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शलभासन: शलभासन करने लिए सबसे पहले आप किसी साफ स्थान पर चटाई बिछा कर उलटे पेट के बल लेट जाएं यानि आपकी पीठ ऊपर की ओर रहे और पेट नीचे जमीन पर रहे. अपने दोनों पैरो को सीधा रखें और अपने पैर के पंजे को सीधे तथा ऊपर की ओर रखें. अपने दोनों हाथों को सीधा करें और उनको जांघों के नीचे दबा लें यानी अपना दायां हाथ दायीं जांघ के नीचे और बायां हाथ बायीं जांघ के नीचे दबा लें. अपने सिर और मुंह को सीधा रखें. फिर अपने को सामान्य रखें और एक गहरी सांस अंदर की ओर लें. अपने दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करें, जितना हो सकता हैं उतना अपनी अधिकतम ऊंचाई तक पैरों को ऊपर करें.

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