Life on Venus: शुक्र पर जीवन तलाशने में वैज्ञानिकों के हाथ लगी निराशा, अब यह ग्रह बनेगा इंसानों का नया बसेरा

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पृथ्वी (Earth) के अलावा ब्रह्मांड (Universe) में कहां-कहां जीवन संभव है, इसकी खोज जारी है. सालों से शोधकर्ता इसी बारे में जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं लेकिन हाल ही में की गई एक स्टडी ने शुक्र ग्रह (Planet Venus) पर जिंदगी होने की आस को तोड़ दिया है.

शुक्र ग्रह पर है पानी की कमी

दरअसल, एक्सपर्ट्स (Experts) का मानना था कि पृथ्वी का ‘ईविल ट्विन’ (Evil Twin) कहा जाने वाला शुक्र ग्रह 700 मिलियन साल पहले रहने योग्य था. जिसको लेकर उम्मीद जताई जा रही थी कि अभी भी वहां जीवन संभव हो सकता है लेकिन उत्तरी आयरलैंड (Northern Ireland) की क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट (Queen’s University Belfast) ने हाल ही में एक शोध किया है, जिसमें गैलीलियो (Galileo) नाम के स्पेस प्रोब (Space probe) समेत कई प्रोब्स से मिले डाटा (Data) की स्टडी की गई थी. आपको बता दें कि गैलीलियो एक अमेरिकी रोबोटिक स्पेस प्रोब (American Robotic Space Probe) है, जिसके जरिए बृहस्पति ग्रह (Jupiter) और उसके चंद्रमाओं (Moons) के साथ-साथ सौर मंडल (Solar system) में मौजूद कई ग्रहों और तारों की जानकारी वैज्ञानिकों (Scientists) को मिलती रही है. इन्हीं जानकारियों के अनुसार अब यह पता चला है कि शुक्र ग्रह पर मौजूद बादलों (clouds) में इतना पानी नहीं है कि वहां का मौसम पृथ्वी की तरह जीवों के लिए रहने लायक हो.

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रहने लायक नहीं है वहां का मौसम

जानकारी के अनुसार जीवों के लिए जिस तरह का वातावरण (Atmosphere) चाहिए होता है, शुक्र ग्रह पर वैसा नहीं है. साथ ही वहां 100 गुना कम पानी मौजूद है जो कि किसी भी जीव के रहने योग्य नहीं है.आपको बता दें कि शुक्र ग्रह पृथ्वी के समान आकार का स्थलीय (Terrestrial) ग्रह है. जहां की सतह का तापमान 464 डिग्री सेल्सियस (Degree Celsius) और प्रेशर (Pressure) हमारी धरती से 92 गुना ज्यादा है. साथ ही शोधकर्ताओं ने इस बात की जानकारी भी दी कि अब शुक्र ग्रह पर भीषण गर्मी, समान न रहने वाला प्रेशर और कोरोसिव एसिड (Corrosive acid) वाले बादल मौजूद हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्यादा मात्रा में बादलों में मौजूद सल्फ्यूरिक एसिड (Sulphuric acid) की वजह से वहां ‘वाटर एक्टिविटी’ (Water activity) की कमी है. इसी यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज (School of Biological Sciences) के डॉ जॉन ई हॉल्सवर्थ (Dr. John E Hallsworth) ने बताया कि पानी के मॉलिक्यूल्स (Water molecules) की एफ्फेक्टिव कॉन्सन्ट्रेशन (Effective Concentration) को वाटर एक्टिविटी कहते हैं. उन्होंने आगे कहा कि शुक्र ग्रहपर यह जरूरी मात्रा से 100 गुना कम में पाई गई है.

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पिछले साल किया गया था जीवन संभव होने का दावा

साथ ही आपको यह भी बता दें कि यह नई रिसर्च पिछले साल छपी एक रिसर्च से बिल्कुल अलग है, जिसमें यह कहा गया था कि शुक्र ग्रह पर मौजूद फास्फीन गैस (Phosphine gas) इस बात का सबूत है कि वहां जीवन संभव है लेकिन अब नई स्टडी से उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है.

अब इस ग्रह पर है जिंदगी संभव होने की उम्मीद

इन सब के बीच एक अच्छी बात यह है कि शोध में यह भी पता चला है कि जुपिटर ग्रह (Jupiter) पर मौजूद बादलों में इतना पानी है कि उस ग्रह पर पर्याप्त पानी होगा यानी वहां वाटर एक्टिविटी सटीक मात्रा में है. डॉक्टर हॉल्सवर्थ ने बताया कि हमने ऐसा होने की बिल्कुल उम्मीद नहीं की थी. हांलाकि, इसी क्रम में आगे उन्होंने यह भी कहा, ‘मैं यह सुझाव नहीं दे रहा हूं कि बृहस्पति पर जीवन है. वहां रहने के लिए सही पोषक तत्वों (Nutrients) की आवश्यकता होगी और मैं इसके बारे में अभी कुछ नहीं कह सकता.’

उन्होंने आगे कहा, ‘जीवन को संभव होने के लिए केवल सही तापमान और पानी का मौजूद होना काफी नहीं है लेकिन फिर भी, यह एक गहन और रोमांचक खोज है जिसकी अपेक्षा भी नहीं की गई थी.’ आपको बता दें कि दूसरे ग्रहों पर जीवन की खोज अभी भी जारी है.

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