Mission Mangal Movie Review: सफल पुरुष ही नहीं सफल देश के पीछे भी होती हैं महिलाएं

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‘मिशन मंगल (Mission Mangal)’ अक्षय कुमार (Akshay Kumar) की राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में बनाई गई तीसरी फिल्म है. स्वतंत्रता दिवस के मौके रिलीज हो रही ये फिल्म ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा (Toilet Ek Prem Katha)’ और ‘पैडमैन (Padman)’ के बाद तिरंगे में तीसरा रंग भी भर देती है. भारत (ISRO) के 2013-14 के मिशन मार्स पर आधारित ये फिल्म उसी कहानी कहती है. जब अमेरिका (NASA) के मावेन ऑर्बिटर टू मार्स (Maven orbiter to Mars) की तुलना में न के बराबर पैसों में भारत ने मार्स ऑर्ब‌िटर मिशन (Mars Orbiter Mission) को अंजाम दिया था. ऐसा करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बना था जो पहले प्रयास में इस मिशन में सफल हुआ था.

‘मिशन मंगल’ प्रयास और प्रयोग के सिद्धांत को आगे बढ़ाती है. हालांकि फिल्म वज्ञानिकों के निजी जीवन से भी मिशन पर पड़ने वाले असर के पहलू को उजागर करती है. फिल्म में मिशन मार्स प्रोजक्ट की कमान इसरो के एक फेल मिशन के वज्ञानिक राकेश धवन (Akshay Kumar) के हाथों में है. असल में इसरो ने पीएसएलवी रॉकेट पर आधारित एक मिशन के फेल होने की सजा के तौर पर उन्हें मिशन मार्स का इंचार्ज बनाता है. लेकिन यहां उनको प्रोजेक्ट मैनेजर तारा शिंदे (Vidya Balan) का मजबूत साथ मिलता है.

मिशन मंगल में विद्या बालन प्रमुख किरदार में हैं.

निजी जीवन भी इसरो के प्रोजेक्ट में डालता है खललअसल में पिछले प्रोजेक्ट फेल होने में तारा‌ शिंदे की बड़ी गलती थी. अब वो इस प्रोजेक्ट में अपनी गलती का प्रायश्चित करना चाहती हैं. इसलिए पूरी ताकत झोंक देती हैं. वह टीम बनाने, बेमन से काम करती टीम में फिर से जज्बा जगाने लेकर मिशन मार्स को बेहद कम पैसों में, बेहद कम समय में लॉन्च के लिए तैयार करा देंती हैं. लेकिन लॉन्च‌िंग के वक्त भारी बारिश शुरू हो जाती है. बारिश लगातार करीब 10 दिनों तक होती है. जबकि एक नीयत समय पर अगर मिसाइल को लॉन्‍च नहीं किया गया तो वह मार्स तक नहीं पहुंच पाएगी. क्योंकि मिसाइल इसी तरह से ‌डिजाइन की गई है कि जब मार्स धरती से सबसे नजदीक होता है तभी वह उसके ऑर्ब‌िट में पहुंच पाएगी. अन्यथा सालों का इंतजार करना होगा.

मुख्य किरदार में अक्षय नहीं विद्या बालन हैं
बेहद चुनौतीपूर्ण तरीकों से तैयार मिशन मार्स का मिसाइल फिल्म में लॉन्च हो पाती है या नहीं इसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी. कुछ बातें जो आपको जाननी जरूरी हैं, उनमें पहली बात ये है कि फिल्म में मुख्य किरदार अक्षय का नहीं बल्कि विद्या बालन हैं.

akshay kumar

अक्षय की यह तीसरी फिल्म है जो राष्ट्र निर्माण के विषय पर है.

असल में ‘मिशन मंगल’ विद्या बालन के किरदार से शुरू होती हैं और आखिर तक उनके कंधों पर ही टिकी रहती है. अक्षर कुमार फिल्म में सेकेंड लीड किरदार में हैं.

इसके बाद के किरदारों में शरमन जोशी, तापसी पन्नू, सोनाक्षी सिन्हा, कीर्ति कुल्हारी, नित्या मेनन, एचजी दत्ताचार्य ने बेहतरीन अभिनय किया है. स्पेशल अपीयरेंस में आए मो. जीशान अयूब ने प्रभावशाली अभिनय किया है. जबकि नेगेटिव किरदार में दिलीप ताहिल ने यह जताने की कोशिश की है कि उनके अंदर अभी और सिनेमा बाकी है. संजय कपूर ने विद्या बालन के पति के किरदार को ठीक से निभाया है और इसरो के चेयरमैन की भूमिका में विक्रम गोखले ने हर बार की तरह सधा हुआ अभिनय किया है.

लेखक-निर्देशक का काम शानदार
‘मिशन मंगल’ के लेखक साजिद-फहद बेहद शानदार स्क्रीन्रप्ले लिखा है. मंगल पर किसी सेटेलाइट को भेजने जैसे विषय पर हिंदी फिल्म लिखना अपने आप में चुनौतीपूर्ण है. ऐसे में ‘पूड़ी छानने’ के होम साइंस के सिद्धांत को अंतरिक्ष में मिसाइल के ईंधन से कैसे जोड़ा जाए, बिना इंधन वाले पानी के जहाज के सिद्धांत को किसी रॉकेट से कैसे जोड़ें यह लेखक के दिमाग की उपज है जो फिल्म को आगे लेकर जाती है.

mission mangal poster

मिशन मंगल बॉक्स ऑफ‌िस पर भी धमाल कर सकती है.

इसी तरह निर्देशक जगन शक्ति ने एक मल्टीस्टार वाली फिल्म में सबके किरदारों के साथ न्याय करते हुए फिल्म को पटरी से उतरने नहीं दिया है. उन्होंने अपनी फिल्म में अक्षय के बजाए विद्या बालन को हीरो बनाने की हिम्मत दिखाई. बल्कि उन्होंने फिल्म में दो गाने इतनी साफगोई से फिट किए कि इसरो के किसी मिशन में काम करने वाले साइंटिस्ट पर फिल्माने के बाद भी वो अटके नहीं. उन्होंने साइंटिस्टों को शराब के नशे में मारपीट करते भी दिखाया, साइंटिस्ट को बेटी के साथ शराब पीकर पब में डांस करते भी.

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इस फिल्म में वे सारे गुण हैं जो बॉक्स ऑफ‌िस पर भी इसे मंगल तक पहुंचा सकते हैं.

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