REVIEW: हड्डियों में जमी ठंड जैसा है ये रहस्यमयी थ्रिलर ‘द लास्ट आवर’

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ये समझना थोड़ा मुश्किल है कि रिटायर्ड अभिनेता संजय कपूर (Sanjay Kapoor) के आने से अमेजन प्राइम वीडियो की वेब सीरीज “द लास्ट आवर (The Last hour)” में क्या खास हो गया है, मगर जो लोग रहस्यमयी थ्रिलर वेब सीरीज देखना चाहते हैं, उनके लिए ये वेब सीरीज बहुत बढ़िया बनाई गयी है. ‘द लास्ट आवर’ का नाम अंग्रेजी में है, मगर पूरी कहानी हिंदी में है, हिंदुस्तान के एक अनछुए हिस्से “सिक्किम” में बसी हुई. संजय कपूर पिछले कुछ दिनों से इंटरव्यू और वक्तव्यों के माध्यम से इस वेब सीरीज का प्रचार करने में व्यस्त रहे हैं. कहानी के चार प्रमुख किरदारों में वो एक किरदार निभा रहे हैं, अरूप का जो मुंबई की पुलिस सेवा से अब सिक्किम की पुलिस सेवा में ट्रांसफर हुए हैं. दूसरा किरदार है उनकी सहकर्मी इंस्पेक्टर लिपिका (शहाना गोस्वामी) का, तीसरा प्रमुख किरदार है अरूप की बेटी परी (शायली कृष्ण) का और सबसे महत्वपूर्ण किरदार है देव (कर्मा तपाका) का जो कि इस वेब सीरीज में एक शमन (आत्माओं से बात करने वाला शख्स) की भूमिका में हैं. वेब सीरीजः द लास्ट आवर सीजनः 1 एपिसोड्सः 8 ड्यूरेशनः 250 मिनिट्स ओटीटीः अमेजन प्राइम वीडियो अरूप सिक्किम पहुंचते हैं और उन्हें एक अभिनेत्री और उसके ड्राइवर के मर्डर का केस मिल जाता है. छानबीन शुरू होती है, केस आगे नहीं बढ़ पाता है क्योंकि मर्डर की वजह समझ नहीं आती. अरूप के मातहत काम करने वाले दो पुलिस कर्मी, जांच के दौरान, शमन शक्तियों वाले देव के भाई और देव की मित्र डोमा के पिता को गोली मार देते हैं. देव के पास शमन शक्तियां होती है जिस के ज़रिये वो मरने वाले के आखिरी घंटे के दृश्य मरने वाले की आत्मा की मदद से देख सकता है. देव घटना स्थल पर पहुंच कर अपनी शमन शक्तियों का इस्तेमाल कर के अरूप को बताता है कि उसके भाई की हत्या अरूप के साथी पुलिस वालों ने की है. मामला गरमा जाता है और अरूप अपने साथियों को गोली मार देता है. देव की शक्तियों की मदद से अरूप को ये पता चलता है कि देव की शमन शक्तियों को छीनने के लिए यमा नाडू नाम का एक शख्स शहर में लड़कियों का रेप और मर्डर कर रहा है. इस बीच देव की मुलाक़ात अरूप की बेटी परी से होती है और उसे प्यार हो जाता है. आगे की पूरी कहानी देव की शक्तियों को यमा नाडू से बचाने की और परी की प्रेम कहानी के बीच घूमती है. हर एपिसोड में देव अपनी शक्तियों की मदद से मर्डर मिस्ट्री सुलझाने की कोशिश करते हैं और अरूप की मदद करता है. यमा नाडू अपनी शक्तियों से परी को मार देता है, और देव के पास एक ही चारा रह जाता है कि वो अपनी शक्तियों की मदद से परी की जान बचा ले. उसके आखिरी घंटे में होने वाली घटनाओं में परिवर्तन कर के.
इस वेब सीरीज को देखने की कई वजहें हैं. एक तो सिक्किम की खूबसूरती देखने को मिलती है. सिनेमेटोग्राफर जयेश नायर ने पहाड़िया, नदी, घुमावदार रास्ते, पहाड़ों पर बने केबिन और सिक्किम की फ़िज़ा में मौजूद ठंडक सीन पर उकेर दी है. देव द्वारा तीरंदाज़ी करने के दृश्य बहुत अच्छे शूट हुए हैं, पहाड़ों की धुंध के बीच गाडी का गुज़ारना, रात में रास्तों पर इक्का दुक्का गाड़ियों का नज़र आने जैसी छोटी छोटी डिटेल्स जयेश ने भली भांति कैप्चर की हैं. एडिटिंग का ज़िम्मा पीटर एल्डरलाइस्टन और एनेलेट मेडेमा को दिया गया है. पीटर ने पहले “द फॉरगॉटन आर्मी” नाम की भारतीय वेब सीरीज भी एडिट की है. एक सस्पेंस वेब सीरीज जिसमें शमन, थोड़ा जादू टोना और थ्रिलर मिलाया जाना होता है उसकी रफ़्तार को पूरी तरह से बनाये रखा है. कुछ एपिसोड्स थोड़े लम्बे लगने लगते हैं मगर कहानी के विस्तार के लिए और सस्पेंस का प्रभाव पैदा करने के लिए बेहद ज़रूरी है. अमेरिका की जिंजर शंकर ने ज़बरदस्त म्यूजिक दिया है. जिंजर खुद बहुत अच्छा वायलिन बजाती हैं और उन्होंने थीम म्यूजिक में डर, सस्पेंस और हड्डियां गला देने वाली ठंड का माहौल बनाने के लिए वायलिन का इस्तेमाल बखूबी किया है. कहानी की बात करें तो इस तरह की लम्बी वेब सीरीज की कल्पना पहले कभी की नहीं गई है. वूट पर रिलीज़ होने वाली “असुर” थोड़ी वीभत्स थी और इंसान के असुर बनने की कहानी के साथ उसमें हिन्दू मान्यताओं का उद्धरण किया गया था. शमन का कॉन्सेप्ट अमेरिका के रेड इंडियन कबीलों में देखने को मिलता है. भारत की किसी वेब सीरीज में ऐसा पहली बार किया गया है इसलिए नवीनता है. कहानी थोड़ी रेंगती है इसलिए कर्मा, शायली और राइमा सेन के अलावा किसी कलाकार से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं हो पाता है. निर्देशक अमित कुमार और लेखिका अनुपमा मिंज की साथ में ये दूसरी कृति है, इन्होने इसके पहले 2013 में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी के साथ मानसून शूटआउट नाम की फिल्म भी लिखी थी. सिक्किम की धुंध में कई रहस्य छुपाने का कहानी का प्रयास बहुत अच्छा है. हालांकि कई जगह कहानी एक लूप में फंसी नज़र आती है, एक ही घटना बार बार होती हुई लगती है, जबकि ऐसा है नहीं. आत्मा को दूसरी दुनिया में ले जाने के लिए निर्देशक ने नाव का इस्तेमाल किया है, वो बहुत ही अलग है…प्रभावशील है. आखिरी एपिसोड में जब रहस्य पर से पर्दा उठता है तो थोड़ा कमज़ोर हो जाता है, यहां ये वेब सीरीज के निर्माता निर्देशक को फिर से सोचने की ज़रुरत थी. संजय कपूर का किरदार एकदम लचर है और उन्होंने अभिनय भी कुछ खास नहीं किया है. वैसे भी उन्हें अभिनय के लिए नहीं जाना जाता. शहाना गोस्वामी को अपने रोल्स को लेकर थोड़ा और गंभीर होना चाहिए. उनका किरदार अच्छा है लेकिन एक अच्छी सम्भावना को सिर्फ एक बैडरूम सीन की वजह से गंवाना पड़ा है. उन्हें किरदार में आयाम देने चाहिए थे. कर्मा तपाका सिक्किम से ही हैं, और अभिनय के साथ फिल्में डायरेक्ट भी करते हैं. ऐसा लगता है कि लेखक उनसे मिलने के बाद ही देव का किरदार बना पाए थे. अच्छा अभिनय किया है मगर अगली बार इन्हें कब देखने वो पता नहीं है. कर्मा ने एफटीआयआय से निर्देशन और पटकथा लेखन में डिप्लोमा किया है. परी के किरदार में शायली मूलतः कश्मीर की रहने वाली हैं और वहां की राजनैतिक उथल पुथल भरी ज़िन्दगी से उन्होंने काफी कुछ सीखा है जो उनके खूबसूरत चेहरे पर नज़र भी आता है. कम उम्र में इतनी परिपक्वता कम देखने को मिलती है. एक खास किरदार में हैं राइमा सेन, जिनके पास पूरी सीरीज में 3 या 4 डायलॉग ही हैं मगर उनकी उपस्थिति, पूरे कथानक को प्रभावित करती रहती है. यमा नाडू की भूमिका में रोबिन तमांग काफी प्रभावशाली रहे हैं, उनका मेकअप भी खासा डरावना लगा है. अगर रफ़्तार से परेशानी न हो तो “द लास्ट आवर” देख सकते हैं हालांकि इतनी देर तक बैठ कर, सारे एपिसोड बिंज वॉच तो शायद नहीं कर पाएंगे, तो किश्तों में देख लीजिये. नए तरह की वेब सीरीज हैं और इस प्रकार की वेब सीरीज को बढ़ावा देने के लिए इसे देखना चाहिए. मर्डर, सस्पेंस, क्राइम, मिस्ट्री, सुपर नेचुरल जैसे विषयों पर और काम करने की सम्भावना बनेगी.

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